February School Holiday – 24 से 28 फ़रवरी तक लगातार स्कूल बंद रहने की खबर ने बच्चों और पेरेंट्स दोनों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है। फ़रवरी के आखिरी हफ्ते में अचानक मिली इस लंबी छुट्टी को लेकर स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे खासे उत्साहित नजर आ रहे हैं, वहीं अभिभावक भी अपने बच्चों के साथ समय बिताने की योजना बना रहे हैं। ठंड के मौसम, क्षेत्रीय त्योहारों, सरकारी निर्देशों और साप्ताहिक अवकाश के मेल से यह लंबा ब्रेक बना है। कई राज्यों में गणतंत्र दिवस की छुट्टी पहले से तय रहती है, और इसके साथ आसपास के दिनों में स्थानीय कारणों से अवकाश जोड़ दिए गए हैं। बच्चों के लिए यह समय सिर्फ आराम का नहीं, बल्कि परिवार के साथ जुड़ने, शौक पूरे करने और पढ़ाई के दबाव से थोड़ी राहत पाने का भी अवसर है। पेरेंट्स इसे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक मान रहे हैं, क्योंकि लगातार पढ़ाई के बीच ऐसा ब्रेक ऊर्जा को फिर से भरने में मदद करता है। इस वजह से फ़रवरी स्कूल हॉलीडे की चर्चा हर जगह हो रही है।

फ़रवरी स्कूल हॉलीडे का कारण क्या है?
24 से 28 फ़रवरी तक स्कूल बंद रहने के पीछे कई कारण एक साथ जुड़े हुए हैं। सबसे बड़ा कारण का राष्ट्रीय अवकाश है, जो पूरे देश में लागू होता है। इसके अलावा कुछ राज्यों और जिलों में 25 या 27 फ़रवरी को स्थानीय त्योहार, प्रशासनिक कारण या मौसम से जुड़ी परिस्थितियों के चलते अतिरिक्त छुट्टी दी गई है। कई स्कूलों ने सर्दी के मौसम को ध्यान में रखते हुए पहले से ही इस अवधि में अवकाश घोषित कर रखा था। जब इन सभी छुट्टियों को साप्ताहिक अवकाश के साथ जोड़ा गया, तो बच्चों को लगातार पांच दिन का ब्रेक मिल गया।
बच्चों और पेरेंट्स पर इसका असर
इस लंबी छुट्टी का असर बच्चों और पेरेंट्स दोनों पर साफ दिखाई दे रहा है। बच्चे जहां पढ़ाई की दिनचर्या से थोड़ी राहत पाकर खुश हैं, वहीं पेरेंट्स अपने बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताने की योजना बना रहे हैं। कई परिवार छोटे ट्रिप, रिश्तेदारों के यहां जाने या घर पर ही मनोरंजक गतिविधियां करने की सोच रहे हैं। बच्चों के लिए यह समय मोबाइल और टीवी से हटकर किताबें पढ़ने, खेल खेलने और नई चीजें सीखने का भी हो सकता है। पेरेंट्स का मानना है कि लगातार स्कूल जाने से बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ता है, ऐसे में यह ब्रेक उनके लिए फायदेमंद है। हालांकि कुछ अभिभावक पढ़ाई को लेकर भी सजग हैं और बच्चों को हल्का-फुल्का रिवीजन कराने की योजना बना रहे हैं, ताकि छुट्टी के बाद पढ़ाई की लय बनी रहे।
छुट्टियों में बच्चों को कैसे रखें एक्टिव
लगातार छुट्टियों के दौरान बच्चों को पूरी तरह खाली छोड़ देना सही नहीं होता। पेरेंट्स इस समय का इस्तेमाल बच्चों की रचनात्मकता बढ़ाने में कर सकते हैं। घर पर ड्राइंग, पेंटिंग, म्यूजिक या डांस जैसी गतिविधियां बच्चों के लिए मजेदार हो सकती हैं। इसके अलावा सुबह या शाम के समय आउटडोर गेम्स खेलने से बच्चों की सेहत भी अच्छी रहती है। पेरेंट्स चाहें तो बच्चों को रोजाना थोड़ा समय पढ़ाई के लिए भी दे सकते हैं, ताकि उनका रूटीन पूरी तरह न टूटे।
स्कूल खुलने के बाद की तैयारी
छुट्टियों के बाद स्कूल खुलते ही बच्चों को फिर से पढ़ाई की दिनचर्या में ढलना पड़ता है। इसलिए पेरेंट्स को चाहिए कि छुट्टी के आखिरी दो दिनों में बच्चों का रूटीन धीरे-धीरे स्कूल टाइम के अनुसार सेट करें। समय पर सोना और जागना, होमवर्क की हल्की तैयारी और स्कूल बैग व्यवस्थित करना इसमें मदद करता है। बच्चों को मानसिक रूप से भी तैयार करना जरूरी है, ताकि उन्हें स्कूल जाने में तनाव न महसूस हो। पेरेंट्स बच्चों से स्कूल से जुड़ी सकारात्मक बातें साझा कर सकते हैं और उन्हें मोटिवेट कर सकते हैं।
